आज मैं ,मैं न रहा, मैं तो कुछ और ही था |
है मुझे याद जब मैं ,यूं ही हंसा करता था,
हर समय बस कोइ बकवास किया करता था,
दोस्तों को भी तो बकवास की ही आदत थी,
यूं ही हर वक्त को मैं साथ ज़िया करता था,
बस ऐसे ही हम हंस के ज़िया करते थे,
साथ में यारों के बस चाय पिया करते थे|
लेकिन हम लोगों की आदत बड़ी निराली थी ,
रात को बस स्टैन्ड जाने की आदत जो सबने डाली थी,
बाहर जाने को बस एनक्वायरी का बहाना बानाते थे,
क्योंकि दो बजे के बाद कैम्पस के सारे टी शाप बन्द हो जाते थे,
मेस का खाना हम लोगो को बोर करता था,
कैम्पस के रेस्टोरेन्टस से भी जी डरता था,
मगर असली खुशी कहीं और आती थी,
वो की जब दोस्तों की जमात बाहार जाती थी|
3-4 घन्टे की बकवास होती थी,
पीने वालों की वो शुभ रात होती थी,
मैं तो सिर्फ़ चाय और पेप्सी का दिवाना होता था,
दोस्तों के दिल में छिपा अफशाना होता था,
कभी कोइ पी कर रोता , तो कोइ बकवास करता था,
ऐसे मौसम में ही गोलू खूब चरता था,
उसकी टक्कर में बस कुलकर्णी हुआ करता था ,
लेकिन अपना एक साथी तो चुपचाप रहा करता था|
उस समय कई दोस्त कुछ सच कह जाते थे,
अगले दिन वो शोरी कहने मेस को आते थे,
हर रोने वाला नाकामे इश्क सुनाता था,
मैं चुपचाप बैठ बस सब सुनता जाता था,
उस माहौल में ही मुझको जाना भाता था|
एक बार हम लोगों ने खूब धूम मचाई ,
लोगो ने मेजों पर चढकर फोटो थीं खिंचवायीं,
उस रात रेत में गिर-गिर कर ,
हम सबने फोटो खिचवाये,
रेस्टोरेन्ट के कुछ बरतन टूटे,
कुछ ने कपडे फड़वाये,
रात्रि कुछ ज्यादा हो गयी,
आटो वाला पी-कर सो गया,
अब हम लोग क्या करें दिमाग गोल हो गया,
किसी तरह से उसे पानी से उठाया ,
और एक बन्दा उसके संग स्टेरिंग पकड़ कर कैम्पस तक आया,
सिक्योरिटी चेक पर मैं सबकी entry कराता था,
क्योंकि दोस्तों को बस अपना नाम ही याद आता था,
ये सब करके ही पढाई में मजा आता था ,
दिमाग तेज और दिल बिन्दास हो जाता था|
सच लोग कहते हैं हर चीज पलट जाती है,
आज बस ख्वाब आते हैं,खुशी तो दूर ही रह जाती है,
है मेरा कलर फोटो,लगता रंग उतरा|
आज मैं, मैं न रहा मैं तो कुछ और ही था|
उस समय मुझको हर एक चीज खुद में नजर आती थी,
हर एक चीज में एक आस सी दिख जाती थी,
ऐसा मेरी वजह से नहीं, शायद उन यारों की करामात थी,
हिम्मत उनसे आती थी और सफलता मिल ही जाती थी|
जिन्दगी के वो हसीन लमहे थे,शायद फिर न आयेंगे ,
बचा पाया हूं जो यादें उन्हीं को अब सजायेंगे,
आज एक शान्त और तनहा शफर बिताता हूं मैं,
याद करता हूं उन लमहों को और मुस्कुराता हूं मैं,
वो व्यवहार अब दोबारा मैं कर नही सकता,
खुशी के आगोश में फिर मैं मर नहि सकता ,
उस तरह का सीन और माहौल नही आयेगा,
सब कुछ आ भी गया तब भी दोस्तों को वैसा फिर से कौन बना पायेगा|
इसलिये कहता हूं कि मैं दूर चला आया हूं,
कल जहाँ था वहाँ की याद बस ला पाया हूँ,
मुझे तुम दोष मत देना अगर मैं कहता हूँ,
यार मैं ,मैं न रहा मैं तो कुछ और ही था||
Nice efforts ....
ReplyDeleteafter so many years i've remembered student life....
ReplyDeleteदो छोर नजर आते हैं।
ReplyDeleteएक छोर उदित सुरज होता नभ मैं,
दुसरे छोर धल जाने को।
दो छोर नजर आते हैं।
मगर नहि आता नज़र बीच का सफ़र।
।।।
कृपया इस बीच के सफ़र को भी कविता में उतारे।।
yaad aa gaye beetein baatien
ReplyDeletenice..
ReplyDeleteExcluding anonymous option,as people are not sending their names with comments, thanks for comments...i'll be following the suggestions in coming posts.:)
ReplyDeletelife is like a playground...there r many people playing around u,reflecting summarisation of ur
ReplyDeletefascinating days.