Tuesday, January 25, 2022

उस दिन

 

उस दिन अगर सुदामा को कृष्णा भूल जाते]

और  नग्न  पैरणो महल छोड़ न आते , 

अगर अपने अश्रुओ से उनके पेअर न धोते

तो सच्चे दोस्त के मैंने आज कुछ और ही होते ]]

उस दिन अगर कृष्णा का रथ दलदल मैं फस  नहीं जाता]

और  छोड़खर कर वो रथ से बाहर नहीं आता,

और कृष्णा  के इसारे पर अर्जुन तीर न चलाता ,

तो एक भाई के कभी दूसरा भाई मारा न जाता  

उस दिन अगर शिखंडी भीष्म के सामने न आता]

और पितामह मर्यादा विवस हो अस्त्र न गिराते]

और उसी समय कृष्णा का इसारा न होता]

तो भीष्म को कभी साइये का सहारा न होताA

अगर गर्भ मैं अभिमन्यु पूरा चक्रव्यूह सुन पाता]

और उसके माँ को सातवे चरण मैं नींद न आता]

या फिर अर्जुन उस दिन भी समर मैं होता]

तो वीर अभिमन्यु कभी तड़प कर मरा नहीं होता] 

अगर उस दिन कौरवो ने मर्यादा तोड कर मरा नहीं होता]

और पांडव पीढ़ी को उजाड़ा न होता]

तो सायद महाभारत भी एक धर्मयुद्ध कहलाता]

और कृष्णा का नाम छलिया न हो पाताA

उस दिन अगर कृष्णा संख न बजाते]

और धर्मराज की बात कुलगुरु ड्रोन सुन पते]

तो सायद एक शिष्य के हाथो एक पाप न होता]

और अपने ही गुरु के वध का अभिशाप न होताA

 

उस दिन अगर दुर्योधन माँ के सामने  पूरा नग्न आता]

तो उसका पूरा सरीर ही वज्र का हो जाता]

या फिर वो ललकार सुन कर भी चुप रह जाता]

और समुन्दर से बाहर न आता]

और इस पर भी यदि भीम कमर के नीचे प्रहार न करते]

तो अधर्म दुर्योधन जैसे लोग कभी न मरते]

ऐसे होने के एक वजह थी]

जो की भाई के सामने द्रोपदी के चीरहरण की सजा थी A

 

अगर महाभारत का युद्ध हुआ न होता]

तो भारत में मर्यादा उलंघन कभी हुआ न होता]

और शूर वीर  मारे  न जाते]

तो भारत के लाल आज भी सूरवीरो के नाम से पुकारे जातेA