Friday, February 25, 2011

On my best friend's farewell

These are some of the feelings that my friend shared with me before leaving.I am wishing him all the best for his future.


दिन रात की तड़पन से अब मजबूर हो गये
कब से थे यूं ही हम तो हालातों से लड़ रहे
मेरे जजबातों की बारिस उस पल न थम सकी
नाकाम होके हम जब पुराने ठिकाने को चल दिये|

कोशिश हजारों मैंने की पर शायद किश्मत को नहीं मंजूर
ताने हजारों सुनकर भी चुपचाप रो लिये|


मेरे जाने के साथ ही कुछ सपने बिखर जायेंगे
जो सजाये थे उम्मीदों से मैंने ,शायद उनका अब लोग मजाक उड़ायेंगे |
समाज को केवल एक परिणाम नजर आता है
तुम असफल रहे तो काम सिर्फ़ शून्य ही रह जता है|
तुम्हारी बेबसता और मजबूरी को कोइ ध्यान नहीं देता|
हंसने को दुनिया है लेकिन तुम्हें हंसाने का कोइ नाम नहीं लेता|

सच बात है कि मुशकिलों में अपना भी पराया हो जाता है
हर कोई फूलों में साथ होता है, काटों में सुलझाने कौन आता है|

नाकामी कैसे भी आये वो नाकामी बन जाती है
अपनी नजरों में ही खुद की औकात गिर जाती है
तुम्हारे निर्णय ही तुम्हें अलग बनाते हैं
उन्हीं को न पूरा करने पर आप खुद ही गिर जाते हैं
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कहीं भी जाॐ कुछ कर दिखॐगा मैं
एक दिन फिर से जगमगॐगा मैं
थक गया हूं इस दौड़ में लेकिन हारा नहीं मैं
बस याद करते रहेना जीत जाॐगा मैं|

Sunday, February 20, 2011

My Old Painting : American Homestead Winter

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It is one of my old paintings,that i painted sometimes in my 11th class.It is now on the wall at my friend's home.
Note: "suttan" is my nick name.

Sunday, February 13, 2011

On The Eve Of V Day

Happy Valentines Day To One N All
आज फिर उसकी कल्पना में ,मैं खो गया......
सारे दोस्त जो बाहर चले गये....और मैं फिर अकेला रह गया अपनी कल्पना के साथ। और वैसे भी मुझे फुरसत कहाँ है अपनी इस रचनत्मकता से।।।।लेकिन हाँ आज मुझे उसकी याद आयी,,,,,,,,
ऐसा पहली बार नही ,अपने तो 25 v'day ऐसे ही गये।।।अरे मजाक कर रहा हूँ।।।हाँ लगभग 10 तो गये,,, उससे पहले तो मैं 15 से कम था ..... और शायद जमाना उस समय इतना आगे नही था।।।।
सो मेरे 10 v'day बस किसी के इन्तजार में,कि कोई सुन्दर,शालीन,सुशील और मुस्कुराती हुइ बहार मेरे बगीचे के फूलों को भी खिला जायेगी,,,,,लेकिन उन हवाओं का बस इन्जार मात्र रहा इस दिल को।।।।।।।
लेकिन कुछ यादें इस दिल के पास भी हैं जो किसी ने दी नहीं इस दिल ने कभी चुरा ली थीं।।।।।शायर जो ठहरा ये दिल......Enjoy V'day with your loved one's|:)
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जागृति


Sunday, February 6, 2011

आज मैं ,मैं न रहा


आज मैं ,मैं न रहा, मैं तो कुछ और ही था |

है मुझे याद जब मैं ,यूं ही हंसा करता था,
हर समय बस कोइ बकवास किया करता था,
दोस्तों को भी तो बकवास की ही आदत थी,
यूं ही हर वक्त को मैं साथ ज़िया करता था,
बस ऐसे ही हम हंस के ज़िया करते थे,
साथ में यारों के बस चाय पिया करते थे|

लेकिन हम लोगों की आदत बड़ी निराली थी ,
रात को बस स्टैन्ड जाने की आदत जो सबने डाली थी,
बाहर जाने को बस एनक्वायरी का बहाना बानाते थे,
क्योंकि दो बजे के बाद कैम्पस के सारे टी शाप बन्द हो जाते थे,
मेस का खाना हम लोगो को बोर करता था,
कैम्पस के रेस्टोरेन्टस से भी जी डरता था,
मगर असली खुशी कहीं और आती थी,
वो की जब दोस्तों की जमात बाहार जाती थी|

3-4 घन्टे की बकवास होती थी,
पीने वालों की वो शुभ रात होती थी,
मैं तो सिर्फ़ चाय और पेप्सी का दिवाना होता था,
दोस्तों के दिल में छिपा अफशाना होता था,
कभी कोइ पी कर रोता , तो कोइ बकवास करता था,
ऐसे मौसम में ही गोलू खूब चरता था,
उसकी टक्कर में बस कुलकर्णी हुआ करता था ,
लेकिन अपना एक साथी तो चुपचाप रहा करता था|

उस समय कई दोस्त कुछ सच कह जाते थे,
अगले दिन वो शोरी कहने मेस को आते थे,
हर रोने वाला नाकामे इश्क सुनाता था,
मैं चुपचाप बैठ बस सब सुनता जाता था,
उस माहौल में ही मुझको जाना  भाता था|

एक बार हम लोगों ने खूब धूम मचाई ,
लोगो ने मेजों पर चढकर फोटो थीं खिंचवायीं,
उस रात रेत में गिर-गिर कर ,
हम सबने फोटो खिचवाये,
रेस्टोरेन्ट के कुछ बरतन टूटे,
कुछ ने कपडे फड़वाये,

रात्रि कुछ ज्यादा हो गयी,
आटो वाला पी-कर सो गया,
अब हम लोग क्या करें दिमाग गोल हो गया,
किसी तरह से उसे पानी से उठाया ,
और एक बन्दा उसके संग स्टेरिंग पकड़ कर कैम्पस तक आया,
सिक्योरिटी चेक पर मैं सबकी entry कराता था,
क्योंकि दोस्तों को बस अपना नाम ही याद आता था,

ये सब करके ही पढाई में मजा आता था ,
दिमाग तेज और दिल बिन्दास हो जाता था|

सच लोग कहते हैं हर चीज पलट जाती है,
आज बस ख्वाब आते हैं,खुशी तो दूर ही रह जाती है,
है मेरा कलर फोटो,लगता रंग उतरा|
आज मैं, मैं न रहा मैं तो कुछ और ही था|

उस समय मुझको हर एक चीज खुद में नजर आती थी,
हर एक चीज में एक आस सी दिख जाती थी,
ऐसा मेरी वजह से नहीं, शायद उन यारों की करामात थी,
हिम्मत उनसे आती थी और सफलता मिल ही जाती थी|

जिन्दगी के वो हसीन लमहे थे,शायद फिर न आयेंगे ,
बचा पाया हूं जो यादें उन्हीं को अब सजायेंगे,
आज एक शान्त और तनहा शफर बिताता हूं मैं,
याद करता हूं उन लमहों को और मुस्कुराता हूं मैं,

वो व्यवहार अब दोबारा मैं कर नही सकता,
खुशी के आगोश में फिर मैं मर नहि सकता ,
उस तरह का सीन और माहौल नही आयेगा,
सब कुछ आ भी गया तब भी दोस्तों को वैसा फिर से कौन बना पायेगा|

इसलिये कहता हूं कि मैं दूर चला आया हूं,
कल जहाँ था वहाँ की याद बस ला पाया हूँ,
मुझे तुम दोष मत देना अगर मैं कहता हूँ,

यार मैं ,मैं न रहा मैं तो कुछ और ही था||