Friday, June 7, 2019




गंगे माँ शिव मस्तक जाएं , स्वच्छ बनाकर भाग्य जगाएं ।
स्वर्ग धरा पर लाना है, गंगा स्वच्छ बनाना है ।



संभु जटा से निकली गंगा,
पर्वत चीर के मार्ग बनाया ।
भगीरथी ने तप करके ये,
ब्रम्हा से वरदान था पाया ॥

पाप मुक्त हुए सगर पुत्र सब ,
भरत भूमि सौभाग्य जगाया ।
मुनियों की इस दिव्य धरा ने ,
गंग नीर से अमृत पाया  ॥

सदी-सदी से भूमि पुत्र है ,
सकल विश्व आनाज उगाता।
इसी दिव्य जल में रहकर ही,
सकल जीव जग-जीवन पाता॥

कुछ दशकों से पापी मानव ,
इस अमृत को जहर बनाता।
कूड़ा , कचरा , गन्दा पानी ,
ये सब माँ की गोद को जाता॥

अशुद्ध नीर से जीव दमन है ,
है असंख्य बीमारी लाता।
थोड़ी मेहनत और चाहत से,
क्यों ना मनु सौभाग्य जगाता ॥

आओ मिलकर करें प्रतिज्ञा ,
गंगा स्वच्छ बनाना है ।
खुद प्रयास और सहभागी बन ,
निर्मल नीर बनाना है ॥

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