उस दिन अगर
सुदामा को कृष्णा
भूल जाते]
और
नग्न
पैरणो महल छोड़
न आते ,
अगर अपने अश्रुओ
से उनके पेअर
न धोते
तो सच्चे दोस्त
के मैंने आज
कुछ और ही
होते ]]
उस दिन अगर कृष्णा का रथ दलदल मैं फस नहीं जाता]
और छोड़खर कर वो रथ से बाहर नहीं आता,
और कृष्णा के इसारे पर अर्जुन तीर न चलाता ,
तो एक भाई के कभी दूसरा भाई मारा न जाता
उस दिन अगर
शिखंडी भीष्म के
सामने न आता]
और पितामह मर्यादा विवस हो अस्त्र
न गिराते]
और उसी समय
कृष्णा का इसारा
न होता]
तो भीष्म को कभी साइये का सहारा न होताA
अगर गर्भ मैं
अभिमन्यु पूरा चक्रव्यूह सुन पाता]
और उसके माँ
को सातवे चरण
मैं नींद न
आता]
या फिर अर्जुन
उस दिन भी
समर मैं होता]
तो वीर अभिमन्यु कभी तड़प कर मरा नहीं होता]
अगर उस दिन
कौरवो ने मर्यादा तोड
कर मरा नहीं होता]
और पांडव पीढ़ी
को उजाड़ा न
होता]
तो सायद महाभारत भी एक धर्मयुद्ध कहलाता]
और कृष्णा का
नाम छलिया न
हो पाताA
उस दिन अगर
कृष्णा संख न
बजाते]
और धर्मराज की
बात कुलगुरु ड्रोन
सुन पते]
तो सायद एक
शिष्य के हाथो
एक पाप न
होता]
और अपने ही
गुरु के वध
का अभिशाप न
होताA
उस दिन अगर दुर्योधन माँ के सामने पूरा
नग्न आता]
तो उसका पूरा
सरीर ही वज्र
का हो जाता]
या फिर वो
ललकार सुन कर
भी चुप रह
जाता]
और समुन्दर से
बाहर न आता]
और इस पर
भी यदि भीम
कमर के नीचे
प्रहार न करते]
तो अधर्म दुर्योधन जैसे लोग कभी
न मरते]
ऐसे होने के
एक वजह थी]
जो की भाई
के सामने द्रोपदी के चीरहरण की
सजा थी A
अगर महाभारत का
युद्ध हुआ न
होता]
तो भारत में
मर्यादा उलंघन कभी
हुआ न होता]
और शूर वीर
मारे न जाते]
तो भारत के
लाल आज भी
सूरवीरो के नाम
से पुकारे जातेA
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